डिजिटल पेमेंट (UPI) के लिए नए नियम
भारत में डिजिटल भुगतान, खासकर UPI (Unified Payments Interface), तेजी से बढ़ रहा है। इसको सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए समय-समय पर नए नियम लागू किए जाते हैं। हाल ही में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव और नियम सामने आए हैं, https://www.profitablecpmratenetwork.com/c5a92uh9f?key=aa1f40729d7b9bafb4ef8a468d3bde43 पालन करना सभी यूज़र्स के लिए जरूरी है।
1. KYC (Know Your Customer) अनिवार्य
अब डिजिटल पेमेंट ऐप्स का पूरा उपयोग करने के लिए KYC पूरा करना जरूरी है। बिना KYC के ट्रांजैक्शन लिमिट कम हो सकती है या कुछ सुविधाएं बंद हो सकती हैं। इससे फर्जी खातों पर रोक लगती है।
2. ट्रांजैक्शन लिमिट तय
UPI के जरिए एक दिन में पैसे भेजने की सीमा तय की गई है। आमतौर पर यह सीमा 1 लाख रुपये तक होती है, लेकिन कुछ विशेष मामलों में इसे बढ़ाया भी जा सकता है। यह नियम धोखाधड़ी को रोकने के लिए बनाया गया है।
3. ऑटो-पे (AutoPay) नियम
सब्सक्रिप्शन या नियमित भुगतान के लिए ऑटो-पे सुविधा में बदलाव किए गए हैं। अब 15,000 रुपये तक के ऑटो-पे ट्रांजैक्शन बिना अतिरिक्त OTP के हो सकते हैं, लेकिन इससे ज्यादा राशि के लिए OTP जरूरी होगा।
4. फ्रॉड से सुरक्षा के लिए नियम
अगर कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन होता है, तो बैंक या ऐप उसे तुरंत रोक सकते हैं। यूज़र्स को भी सलाह दी जाती है कि वे अपना UPI पिन किसी के साथ साझा न करें और अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
5. नए यूज़र्स के लिए कूलिंग पीरियड
नए UPI यूज़र्स के लिए शुरू के 24 घंटे में ट्रांजैक्शन लिमिट कम रखी जाती है। इसे “कूलिंग पीरियड” कहा जाता है, ताकि किसी भी गलत गतिविधि को रोका जा सके।
6. UPI ID और मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन
अब UPI ID को मोबाइल नंबर से लिंक और वेरिफाई करना अनिवार्य है। इससे सही व्यक्ति तक पैसा पहुंचता है और गलत ट्रांजैक्शन की संभावना कम होती है।
निष्कर्ष
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